उधर, विरोधी तत्वों द्वारा उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में इस आन्दोलन के संपर्क केंद्र 'शहीद भगतसिंह पुस्तकालय' की खिड़की से रात को पत्थर फेंके गए। इससे यह साबित होता है कि मज़दूर हितों से गद्दारी करने वाले तत्व हताशा में एक-पर-एक निकृष्ट हरकतें करते जा रहे हैं। दूसरी ओर, ठेका प्रथा खत्म करने, न्यूनतम मज़दूरी लागू करने, झुग्गीवासियों को पक्के मकान देने सहित मज़दूरों के हकों की मांगों के प्रति हज़ारों मज़दूरों का समर्थन-सहयोग व्यापक से व्यापक होता जा रहा है।
Sunday, February 2, 2014
"मेहनतकश जन जागो, अपना हक लड़कर मांगो!''
उधर, विरोधी तत्वों द्वारा उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में इस आन्दोलन के संपर्क केंद्र 'शहीद भगतसिंह पुस्तकालय' की खिड़की से रात को पत्थर फेंके गए। इससे यह साबित होता है कि मज़दूर हितों से गद्दारी करने वाले तत्व हताशा में एक-पर-एक निकृष्ट हरकतें करते जा रहे हैं। दूसरी ओर, ठेका प्रथा खत्म करने, न्यूनतम मज़दूरी लागू करने, झुग्गीवासियों को पक्के मकान देने सहित मज़दूरों के हकों की मांगों के प्रति हज़ारों मज़दूरों का समर्थन-सहयोग व्यापक से व्यापक होता जा रहा है।
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