Sunday, January 26, 2014

वज़ीरपुर कारखाना मज़दूर यूनियन ने चलाया मांगपत्रक आंदोलन

26 जनवरी। वजीरपुर में गरम रोला, ठंडा रोला, और स्टील लाइन के मज़दूरों के काम के हालात बेहद दयनीय है. १२-१४ घंटे 2000 डिग्री तापमान पर लोहे को स्टील में ढालते और फिर बर्तन, कीलें, कीपें व स्टील के अन्य पार्ट्स बनाते हैं। फैक्टरियों में आये दिन मज़दूर अपनी उंगलियां या हाथ गवां देते हैं या उनकी मौत हो जाती है, न तो किसी को मुआवजा मिलता है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें जाते हैं। रेलवे लाइन के किनारे बसी हुयी झुग्गियों में फैक्टरियों का एसिड भरा रहता है जो पैर भी खराब करता है और रिस कर पानी की लाईन में भी जाता है। पटरी पर आये दिन किसी बच्चे की पटरी पर कट कर मौत हो जाती है। केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल को इस झकझोर देने वाली सच्चाई से मुखातिब कराने वज़ीरपुर कारखाना मज़दूर यूनियन के बैनर तले मज़दूर आने वाले बुद्धवार, 29 जनवरी को दिल्ली सचिवालय जा रहे हैं।




Thursday, January 23, 2014

कीर्ति नगर और नारायणा में दिल्ली मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन



२३ जनवरी। कीर्ति नगर और नारायणा की फैक्ट्रियों के शोर को भेदकर मज़दूरों तक पहुंची दिल्ली मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन के नारों की आवाज़!! ६ फरवरी को घेरेंगे केजरीवाल को अपने हकों के लिए!!

Wednesday, January 22, 2014

भोरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र पहुंचा दिल्‍ली के मांगपत्रक आन्‍दोलन का जत्‍था

दिल्‍ली, 22 जनवरी। दिल्‍ली के मांगपत्रक आन्‍दोलन का जत्‍था आज सुबह भोरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र के उस मोड़ पर पहुंचा जहां से भोरगढ़ गांव के लॉजों में किराए पर रहने वाली मज़दूर आबादी अलग-अलग कारखानों में काम करने के लिए निकलती है। वहां उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली मज़दूर यूनियन व स्‍त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने काम पर निकलने वाले इन मज़दूरों के बीच 6 फरवरी के अभियान का पर्चा बांटा और जनसंपर्क किया। कार्यकर्ताओं ने उन्‍हें चुनाव पूर्व  अरविंद केजरीवाल द्वारा गरीबों-मजदूरों के लिए किए गए वायदों के बारे में बताया, जिनके बारे में उन्‍होंने चुनाव जीतने के बाद चुप्‍पी साध ली है।  यूनियन के साथियों ने इन वायदों की याददिहानी के लिए और उन्‍हें पूरा करने का दबाव बनाने के लिए 6 फरवरी को लाखों की तादाद में दिल्‍ली सचिवालय को घेरने का आह्वान किया।

काम के लिए यहां से गुजरती आबादी को देखकर बरबस ही चार्ली-चैपलिन की फिल्‍म 'मॉडर्न टाइम्‍स' की याद आ जाती है। ये मज़दूर आबादी इक्‍कसवीं सदी में भी दोहरी गुलामी झेलने को मजबूर है और एक तरफ कारखाना मालिकों की गालियों, डांट-फटकार, घूसे-थप्‍पड़ की मार, तो दूसरी तरफ भोरगढ़ गांव के मकान मालिकों के ऑक्‍टोपसी पंजे के बीच फंसे रहने को मजबूर है। यहां के मकान मालिक मनमाने रेट पर बिजली का भुगतान करते हैं तथा अपने घरों में खोली हुई दुकानों से ही राशन व अन्‍य सामान लेने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसा ना करने पर मज़दूरों से मकान खाली करवा लेते हैं। कारखाना मालिक तो  उन्‍हें मनमाने तरीके से गुलामों-जानवरों की खटाते ही हैं। दलाल तथा गद्दार ट्रेड यूनियनों की करतूतों से भी यहां की व्‍यापक मज़दूर आबादी निराश-हताश है। इन मज़दूरों के चेहरे पर इस छटपटाहट की शिनाख्‍़त की जा सकती है। बस एक सब्र का बांध है जिसने इनके गुस्‍से को फूटकर धधकते लावे की तरह बहकर बाहर निकलने से रोका हुआ है।

आज सुबह जब यूनियन के कार्यकर्ता उनके बीच पहुंचे तो काम पर पहुंचने की जल्‍दी के बावजूद उन्‍होंने साथियों की बात सुनी, पर्चे लिए और अपने नाम व पते नोट कराए।



Tuesday, January 21, 2014

बाहरी दिल्‍ली की सर्वाधिक उपेक्षित बस्‍ती सेक्‍टर-27, रोहिणी में पहुंचे मांगपत्रक आन्‍दोलन के कार्यकर्ता


दिल्‍ली, 21 जनवरी। उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली की सबसे अलग-थलग, उपेक्षित और संघर्षशील बस्तियों में से एक सेक्‍टर-27, रोहिणी की जे.जे. कालोनी में जब लोग बारिश और ठण्‍ड के बावजूद सिकुड़ते-ठिठुरते अपने-अपने काम पर निकल रहे थे तभी वहां नारों की गूंज से उनके पैर ठिठक गए। कुछ नौजवानों को 'श्रम कानून लागू करो', 'मज़दूर मांगपत्रक आन्‍दोलन', आदि के बैनर टांगे नारे लगाते देख कर वे उनके इर्द-गिर्द जमा हो गए और फिर उनके भाषण को ध्‍यान से सुनते हुए उनसे 6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय का आह्वान करने वाला पर्चा लेने लगे। दरअसल, आज दिल्‍ली के मजदूर मांगपत्रक आंदोलन के तहत इसी बस्‍ती में प्रचार व जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा था।
स्‍त्री-पुरुष, युवा-वृद्ध सभी उत्तर-पश्चिमी दिल्‍ली मजदूर यूनियन और स्‍त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ताओं को घेरे हुए थे। कार्यकर्ताओं ने उन्‍हें चुनाव पूर्व  अरविंद केजरीवाल द्वारा गरीबों-मजदूरों के लिए किए गए वायदों के बारे में बताया, जिनके बारे में उन्‍होंने चुनाव जीतने के बाद चुप्‍पी साध ली है।  यूनियन के साथियों ने इन वायदों की याददिहानी के लिए और उन्‍हें पूरा करने का दबाव बनाने के लिए 6 फरवरी को लाखों की तादाद में दिल्‍ली सचिवालय को घेरने का आह्वान किया। 

बताते चलें कि सेक्‍टर-27 की बस्‍ती बरसों से सर्वाधिक उपेक्षित बस्तियों में से एक बनी हुई है। ना तो यहां आने-जाने के लिए सड़क है, ना गंदे पानी की निकासी की व्‍यवस्‍था, ना बच्‍चों के खेलने के लिए पार्क, ना पुलिस चौकी, ना परिवहन के नियमित साधन। यहां रहने वाले मजदूर सुबह टैम्‍पों में भरकर मायापुरी, नारायणा आदि के कारखानों में काम करने जाते हैं, तो कुछ बादली, शाहाबाद डेयरी, बवाना, नरेला, होलंबी कला के उद्योगों में काम करने जाते हैं या आसपास के इलाकों में बेलदारी, पल्‍लेदारी आदि का काम करते हैं। उन्‍होंने इस बात की ताईद की कि किसी भी कारखाने में श्रम कानून लागू नहीं होते और उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया जाता है। महिलाओं को तो दोहरी मार झेलनी पड़ती है। उनके लिए कोई सुविधा नहीं होती। लेकिन जिंदा रहने के लिए और अपने बच्‍चे पालने के लिए उन्‍हें यह सब झेलना पड़ता है। यहां,  अपराध भी बड़े पैमाने पर होता है, और आए दिन मज़दूरों तक से छीना-झपटी, उन्‍हें चाकू-ब्‍लेड मारने की घटनाएं होती रहती हैं, हत्‍या होना भी आम बात हो गयी है। यहां के एक निवासी ने बताया कि कुछ ही दिन पहले सरेआम उनके बेटे की हत्‍या कर दी गयी, लेकिन रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद  दो महीने से हत्‍यारों को पकड़ा नहीं गया है। उनका कहना है कि पुलिस हर बार यही कह कर टरका देती है तफ्तीश जारी है। उनके अलावा वहां मिलने वाले सभी लोगों ने कहा कि कारखानों, दुकानों  आदि में मालिकों, ठेकेदारों के जुल्‍म सहते हैं, और बस्‍ती में अपराधियों के खौफ के साये में जीते हैं।  
अपने जीवन और काम की बदतर स्थितियों को बदलने के लिए आक्रोशित बस्‍तीवासियों ने इस अभियान का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि वे 6 फरवरी को दिल्‍ली सचिवालय जरूर पहुंचेंगे। इसके बाद सैकड़ों मजदूरों ने अपने नाम व पते दर्ज करवाए।










Sunday, January 19, 2014

शाहाबाद डेयरी और रोहिणी सेक्टर-26 में चला मांगपत्रक अभियान

दिल्ली । उत्तीर-पश्चिमी दिल्ली मज़दूर यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन ने 'मांगपत्रक आन्दोलन' के तहत रोहिणी के सेक्टर-26 और शाहाबाद डेयरी के बी ब्लॉद में अभियान चलाकर पर्चे बांटे, जनसभाएं की और घर-घर जाकर संपर्क किया। कार्यकर्ताओं ने सभी को मुख्यमंत्री केजरीवाल द्वारा चुनाव से पहले मजदूरों के लिए किए वायदे याद दिलाने के लिए 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय पर इकट्ठा होने का आह्वान किया।
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में 18 और 19 जनवरी को शाहाबाद डेयरी और रोहिणी सेक्टर-26 में चले अभियान के तहत जगह-जगह जनसभाएं करके पर्चा वितरण, जनसंपर्क किया गया। हर जगह गरीब-मजदूर आबादी ने बताया कि उन्हें श्रम कानून के तहत अन्य सुविधाएं तो मिलना दूर रहा, न्यूनतम मज़दूरी तक नहीं मिलती है। इन अभियानों में महिलाओं ने भी 6 फरवरी को दिल्लीय सचिवालय पर चलने के लिए अपने नाम लिखवाए और खुद कहा कि जब तक हम मिलकर लड़ेंगे नहीं तब तक हमें अधिकार नहीं मिलने वाले और मालिक लोग हमें कीड़े-मकोड़े से ज्यातदा नहीं समझते। कार्यकर्ताओं ने भी 'दिल्ली  मांगपत्रक अभियान' के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि यह आपकी लड़ाई है और इसके लिए आपको एकजुट होना होगा। न्यूनतम मजदूरी, ई.एस.आई.,  पी.एफ. मिलना हमारा अधिकार है और हम इसे लड़कर लेंगे। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी चुनाव जीतने से पहले कई वायदे  किए थे, जैसे कि उन्होंने एक वायदा यह किया था कि ठेकाप्रथा समाप्त करेंगे। इसलिए, यह जरूरी है कि हम उन्हें ये वायदे याद दिलाएं और इन्हें  जल्द से जल्द लागू करने का दबाव  बनाएं।









Wednesday, January 15, 2014

पीरागढ़ी में मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन

वैसे तो पीरागढ़ी दिल्ली में जूतों के उत्पादन के लिए मशहूर है। एक्शन, कैम्पस से लेकर छोटी बड़ी सैकड़ों जूतों की व गारमेंट की कम्पनियां हैं जो दिल्ली के खाते पीते वर्ग की ज़रूरतों को पूरा करती हैं। परन्तु इन फैक्टरियों में काम करने वाले लाखों मज़दूरों के साथ बर्बर किस्म का शोषण होता है। 'आप' कि राखी बिड़ला खुद मंगोल पूरी क्षेत्र से विधायक हैं पर इन्हे मज़दूरो के उत्पीड़न से कोई फर्क नहीं पड़ता है। 2011 में ही पीरागढ़ी की H-9 फैक्ट्री में सुरक्षा में लापरवाही की वजह से 70 से अधिक मज़दूर जल कर मर गए थे पर प्रशासन मालिक को बचाने में लगा रहा था। यह फिर से दोहराया न जाये इसीलिए उद्योग नगर मज़दूर यूनियन और मंगोलपूरी मज़दूर यूनियन ने मज़दूरों के बीच मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन चलाया जिससे कि आने वाली ६ फरवरी को केजरीवाल की सरकार इस बात की गारंटी करे कि पीरागढ़ी के मज़दूर भी अपने हक़ हासिल करें।