Sunday, January 26, 2014
वज़ीरपुर कारखाना मज़दूर यूनियन ने चलाया मांगपत्रक आंदोलन
Thursday, January 23, 2014
Wednesday, January 22, 2014
भोरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र पहुंचा दिल्ली के मांगपत्रक आन्दोलन का जत्था
काम के लिए यहां से गुजरती आबादी को देखकर बरबस ही चार्ली-चैपलिन की फिल्म 'मॉडर्न टाइम्स' की याद आ जाती है। ये मज़दूर आबादी इक्कसवीं सदी में भी दोहरी गुलामी झेलने को मजबूर है और एक तरफ कारखाना मालिकों की गालियों, डांट-फटकार, घूसे-थप्पड़ की मार, तो दूसरी तरफ भोरगढ़ गांव के मकान मालिकों के ऑक्टोपसी पंजे के बीच फंसे रहने को मजबूर है। यहां के मकान मालिक मनमाने रेट पर बिजली का भुगतान करते हैं तथा अपने घरों में खोली हुई दुकानों से ही राशन व अन्य सामान लेने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसा ना करने पर मज़दूरों से मकान खाली करवा लेते हैं। कारखाना मालिक तो उन्हें मनमाने तरीके से गुलामों-जानवरों की खटाते ही हैं। दलाल तथा गद्दार ट्रेड यूनियनों की करतूतों से भी यहां की व्यापक मज़दूर आबादी निराश-हताश है। इन मज़दूरों के चेहरे पर इस छटपटाहट की शिनाख़्त की जा सकती है। बस एक सब्र का बांध है जिसने इनके गुस्से को फूटकर धधकते लावे की तरह बहकर बाहर निकलने से रोका हुआ है।
आज सुबह जब यूनियन के कार्यकर्ता उनके बीच पहुंचे तो काम पर पहुंचने की जल्दी के बावजूद उन्होंने साथियों की बात सुनी, पर्चे लिए और अपने नाम व पते नोट कराए।
Tuesday, January 21, 2014
बाहरी दिल्ली की सर्वाधिक उपेक्षित बस्ती सेक्टर-27, रोहिणी में पहुंचे मांगपत्रक आन्दोलन के कार्यकर्ता
स्त्री-पुरुष, युवा-वृद्ध सभी उत्तर-पश्चिमी दिल्ली मजदूर यूनियन और स्त्री मज़दूर संगठन के कार्यकर्ताओं को घेरे हुए थे। कार्यकर्ताओं ने उन्हें चुनाव पूर्व अरविंद केजरीवाल द्वारा गरीबों-मजदूरों के लिए किए गए वायदों के बारे में बताया, जिनके बारे में उन्होंने चुनाव जीतने के बाद चुप्पी साध ली है। यूनियन के साथियों ने इन वायदों की याददिहानी के लिए और उन्हें पूरा करने का दबाव बनाने के लिए 6 फरवरी को लाखों की तादाद में दिल्ली सचिवालय को घेरने का आह्वान किया।
बताते चलें कि सेक्टर-27 की बस्ती बरसों से सर्वाधिक उपेक्षित बस्तियों में से एक बनी हुई है। ना तो यहां आने-जाने के लिए सड़क है, ना गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था, ना बच्चों के खेलने के लिए पार्क, ना पुलिस चौकी, ना परिवहन के नियमित साधन। यहां रहने वाले मजदूर सुबह टैम्पों में भरकर मायापुरी, नारायणा आदि के कारखानों में काम करने जाते हैं, तो कुछ बादली, शाहाबाद डेयरी, बवाना, नरेला, होलंबी कला के उद्योगों में काम करने जाते हैं या आसपास के इलाकों में बेलदारी, पल्लेदारी आदि का काम करते हैं। उन्होंने इस बात की ताईद की कि किसी भी कारखाने में श्रम कानून लागू नहीं होते और उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया जाता है। महिलाओं को तो दोहरी मार झेलनी पड़ती है। उनके लिए कोई सुविधा नहीं होती। लेकिन जिंदा रहने के लिए और अपने बच्चे पालने के लिए उन्हें यह सब झेलना पड़ता है। यहां, अपराध भी बड़े पैमाने पर होता है, और आए दिन मज़दूरों तक से छीना-झपटी, उन्हें चाकू-ब्लेड मारने की घटनाएं होती रहती हैं, हत्या होना भी आम बात हो गयी है। यहां के एक निवासी ने बताया कि कुछ ही दिन पहले सरेआम उनके बेटे की हत्या कर दी गयी, लेकिन रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद दो महीने से हत्यारों को पकड़ा नहीं गया है। उनका कहना है कि पुलिस हर बार यही कह कर टरका देती है तफ्तीश जारी है। उनके अलावा वहां मिलने वाले सभी लोगों ने कहा कि कारखानों, दुकानों आदि में मालिकों, ठेकेदारों के जुल्म सहते हैं, और बस्ती में अपराधियों के खौफ के साये में जीते हैं।
अपने जीवन और काम की बदतर स्थितियों को बदलने के लिए आक्रोशित बस्तीवासियों ने इस अभियान का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि वे 6 फरवरी को दिल्ली सचिवालय जरूर पहुंचेंगे। इसके बाद सैकड़ों मजदूरों ने अपने नाम व पते दर्ज करवाए।
Monday, January 20, 2014
Sunday, January 19, 2014
शाहाबाद डेयरी और रोहिणी सेक्टर-26 में चला मांगपत्रक अभियान
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में 18 और 19 जनवरी को शाहाबाद डेयरी और रोहिणी सेक्टर-26 में चले अभियान के तहत जगह-जगह जनसभाएं करके पर्चा वितरण, जनसंपर्क किया गया। हर जगह गरीब-मजदूर आबादी ने बताया कि उन्हें श्रम कानून के तहत अन्य सुविधाएं तो मिलना दूर रहा, न्यूनतम मज़दूरी तक नहीं मिलती है। इन अभियानों में महिलाओं ने भी 6 फरवरी को दिल्लीय सचिवालय पर चलने के लिए अपने नाम लिखवाए और खुद कहा कि जब तक हम मिलकर लड़ेंगे नहीं तब तक हमें अधिकार नहीं मिलने वाले और मालिक लोग हमें कीड़े-मकोड़े से ज्यातदा नहीं समझते। कार्यकर्ताओं ने भी 'दिल्ली मांगपत्रक अभियान' के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि यह आपकी लड़ाई है और इसके लिए आपको एकजुट होना होगा। न्यूनतम मजदूरी, ई.एस.आई., पी.एफ. मिलना हमारा अधिकार है और हम इसे लड़कर लेंगे। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी चुनाव जीतने से पहले कई वायदे किए थे, जैसे कि उन्होंने एक वायदा यह किया था कि ठेकाप्रथा समाप्त करेंगे। इसलिए, यह जरूरी है कि हम उन्हें ये वायदे याद दिलाएं और इन्हें जल्द से जल्द लागू करने का दबाव बनाएं।
Wednesday, January 15, 2014
पीरागढ़ी में मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन
वैसे तो पीरागढ़ी दिल्ली में जूतों के उत्पादन के लिए मशहूर है। एक्शन, कैम्पस से लेकर छोटी बड़ी सैकड़ों जूतों की व गारमेंट की कम्पनियां हैं जो दिल्ली के खाते पीते वर्ग की ज़रूरतों को पूरा करती हैं। परन्तु इन फैक्टरियों में काम करने वाले लाखों मज़दूरों के साथ बर्बर किस्म का शोषण होता है। 'आप' कि राखी बिड़ला खुद मंगोल पूरी क्षेत्र से विधायक हैं पर इन्हे मज़दूरो के उत्पीड़न से कोई फर्क नहीं पड़ता है। 2011 में ही पीरागढ़ी की H-9 फैक्ट्री में सुरक्षा में लापरवाही की वजह से 70 से अधिक मज़दूर जल कर मर गए थे पर प्रशासन मालिक को बचाने में लगा रहा था। यह फिर से दोहराया न जाये इसीलिए उद्योग नगर मज़दूर यूनियन और मंगोलपूरी मज़दूर यूनियन ने मज़दूरों के बीच मज़दूर मांगपत्रक आंदोलन चलाया जिससे कि आने वाली ६ फरवरी को केजरीवाल की सरकार इस बात की गारंटी करे कि पीरागढ़ी के मज़दूर भी अपने हक़ हासिल करें।
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